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प्रधान मंत्री हो तो ऐसा, खुद विमान चलाकर किराया भी भरते हैं यह PM

दुनिया भर के राष्ट्राध्यक्षों के लिए सरकारी खर्च पर ऐशो-आराम करना और पूरे ठाठ-बाट से यात्राएं करना नई बात नहीं है। जनता द्वारा दिए गए टैक्स के पैसों का एक बड़ा हिस्सा नेताओं पर और सरकारी खर्चों में खर्च होता है। राष्ट्रप्रमुखों को कई सुविधाएं तो मिलती ही हैं और यात्राओं के दौरान एक बड़ा कारवां भी उनके साथ चलता है। यह सब सरकारी खर्च पर किया जाता है। भारत में तो राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री क्या, मुख्यमंत्रियों और उनके मंत्रियों का भी बहुत ठाठ होता है। लेकिन इसी दुनिया में कुछ अपवाद भी हैं। फिनलैंड के प्रधानमंत्री जुहा सिपिला को ही ले लीजिए। 55 साल के सिपिला ना केवल खुद अपना विमान उड़ाते हैं, बल्कि इसके पैसे भी चुकाते हैं।

साल 2015 में प्रधानमंत्री का पद संभालने वाले सिपिला राजनीति में आने से पहले IT के क्षेत्र का एक बड़ा नाम थे। उनका काफी लंबा-चौड़ा कारोबार था और इसमें उन्होंने अरबों रुपये कमाए। सिपिला खुद भी एक इंजिनियर थे। उनकी पहचान एक मृदुभाषी और ईमानदार इंसान की है।

आधिकारिक यात्राओं के दौरान अक्सर ही सिपिला खुद ही अपना विमान उड़ाते हैं। वह जिन विमानों को उड़ाते हैं, वे उनके अपने नहीं। किराये पर निजी जेट विमान लेकर सिपिला ना केवल उन्हें खुद ही उड़ाते हैं, बल्कि विमान को किराये पर लेना का पैसा भी खुद अपनी ही जेब से देते हैं। सिपिला सरकारी खर्च को कम करने की वकालत करते हैं। उनका मानना है कि सरकारी तामझाम में जनता का पैसा बर्बाद नहीं किया जाना चाहिए। फिनलैंड की एक पत्रिका के मुताबिक, प्रधानमंत्री सिपिला को एक यात्रा के लिए इन विमानों का भारी-भरकम किराया चुकाना पड़ता होगा। यह राशि लाखों यूरो में हो सकती है।

सिपिला अबतक ऐसी 19 आधिकारिक यात्राओं पर जा चुके हैं। 2016 में PM सिपिला खुद 5,000 किलोमीटर तक विमान उड़ाकर फिनलैंड से मंगोलिया की राजधानी उलन बतोर पहुंचे। इस यात्रा के दौरान उन्होंने 6-7 यात्री क्षमता वाला सेसना 525 बिजनस जेट विमान उड़ाया था। इसके बाद 1,400 किलोमीटर तक और विमान चलाकर वह यूरोपियन यूनियन के नेताओं से मिलने पहुंचे।

ऐसा नहीं कि सिपिला ने हमेशा खुद विमान उड़ाकर और खुद ही इसका पैसा चुकाकर सरकारी खर्च बचाने की मिसाल पेश की हो। नवंबर 2015 में गठबंधन की बातचीत खत्म होने के बाद प्रधानमंत्री सिपिला को उत्तरी फिनलैंड में स्थित अपने शहर ऑलू वापस लौटना था। यह बैठक प्रस्तावित समय पर खत्म ना होकर देर तक चली, तो सिपिला की विमान मिस हो गई। सिपिला ने इस बार निजी विमान ऑर्डर नहीं किया, बल्कि वह एक ऐम्बुलेंस विमान में बैठ गए। विमान के अंदर यात्रियों के बैठने के लिए बची आखिरी सीट मिना मारिया को दे दी। एक घंटे की यह यात्रा उन्होंने पायलट के शौचालय की सीट पर बैठकर पूरी की।

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