योगी के गढ़ गोरखपुर में सपा नेता की हत्या कर खेत में गाड़ दिया गया शव

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योगी आदित्यनाथ के यूपी के सीएम बनने के बाद उनके कामों को लेकर लगातार आठवें दिन वो न्यूज चैनलों पर ब्रेकिंग न्यूज बने हुए हैं, जिनके संसदीय क्षेत्र गोरखपुर के बारे में कहा जाता है कि गोरखुपुर में योगी के प्रशासन की तूती बोलती है। उनके गोरखपुर से एक ऐसी खबर आई है जो सात माह से गायब हुए सपा नेता की है। जिनकी हत्या कर दी गई है।

सात माह से लापता सपा नेता व प्रापर्टी डीलर संजय यादव के मामले की गुत्थी पुलिस ने सुलझा दी है। संजय की हत्या करने के बाद शव को खेत में दफना दिया गया था। पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर खेत से अवशेष को बाहर निकाला। घरवालों ने जूता व कपड़ो से पहचान कर ली है हालांकि लाश सड़ी होने की वजह से पहचान नहीं हो पा रही थी। पहचान के लिए पुलिस डीएनए टेस्ट करायेगी।

अमर उजाला के मुताबिक, खोराबार के कजाकपुर निवासी सपा नेता संजय यादव प्रापर्टी डीलिंग भी करते थे। 24 अक्बटूर को जमीन का बैनामा कराने घर से कचहरी के लिए निकले थे और लापता हो गये। अगले दिन 25 अक्टुबर को उनकी कार कुशीनगर के हाटा कोतवाली क्षेत्र में लावारिस हालत में बरामद हुई थी। पुलिस ने संजय के भाई दीपक की तहरीर पर अज्ञात बदमाशों के खिलाफ अपहरण का मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी।

जांच में क्राइम ब्रांच को मृतक माफिया लालबहादूर यादव के भाई विजय यादव व दान बहादुर यादव के हत्या में शामिल होने की जानकारी मिली। शक के आधार पर क्राइम ब्रांच की टीम ने रविवार की रात विजय को उठा लिया और पूछताछ की तो मामला खुल कर सामने आ गया।

दान बहादुर को भी पुलिस ने हिरासत में लिया जिसके बाद पता चला कि गोली मारकर हत्या करने के बाद शव को खेत में दफनाया गया था। दान बहादुर द्वारा बताये गये जगह पर खुदाई कर पुलिस ने शव को बरामद कर लिया है।

24 अक्टूबर को हुए थे लापता

आपको बता दें कि खोराबार के कजाकपुर के रहने वाले संजय यादव 24 अक्टूबर की सुबह साढ़े नौ बजे अपने कार से कचहरी के लिए निकले थे। कचहरी में उन्हें जमीन की रजिस्ट्री करानी थी। कागजात की तैयारी के लिए संजय का छोटा भाई पहले ही कचहरी पहुंच गया था। कागज तैयार होने के बाद भाई ने जब संजय को फोन किया तो उसका मोबाइल बंद आने लगा।

शाम को संजय जब घर नहीं लौटे तो घरवालों ने अनहोनी की आशंका जताते हुए पुलिस को सूचना दी। अगले दिन सुबह सपा का झंडा लगी कार कुशीनगर में मिली, जिसकी पहचान संजय के कार के रूप में हुई। इसके बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शूरू की तो पता चला कि उस दिन गाड़ी बेलीपार में दिखाई दी थी। जांच में पुष्टि होने के बाद पुलिस ने विजय और दान बहादुर को हिरासत में लिया और मामला खुल गया।

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