कर्ज माफी के फैसले से किसान हुए नाराज़, सरकार पर लगाया भेदभाव का आरोप

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उत्तर प्रदेश सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में किसान बड़ी आस लगाए बैठे थे। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पूर्व भाजपा ने किसानों को कर्जा माफ करने का जो वादा किया था, उसके ऐलान के बाद किसानों में खुशी नहीं है। आगरा के किसानों ने योगी आदित्यनाथ सरकार से कर्ज माफ करने की मांग की थी, कि सभी किसानों का कर्जा माफ किया जाए। आगरा की बात की जाए, तो यहां अकेले सात हजार करोड़ रुपया कर्ज किसानों के पास है।

1800 करोड़ कर्ज

भाजपा ने चुनावी में जारी किए संकल्प पत्र के वायदे में किसानों का कर्ज माफ करने का ऐलान किया था। आगरा में किसानों का 1800 करोड़ रुपये कर्ज है। सार्वजनिक क्षेत्र की 27 बैंकों की 475 शाखाओं ने जिले में करीब 82 हजार किसानों को फसल के लिए लोन दिया। करीब सात हजार करोड़ रुपये का कर्ज अभी भी किसानों के पास है। जिसमें लघु और सीमांत किसानों पर करीब 1800 करोड़ का रुपये ऋण है। बीते वित्तीय वर्ष की बात की जाए, तो 2016.17 में ही बैंकों ने किसानों को 1753 करोड़ रुपये का क्राप लोन बांटा था।
सबका हो लोन माफ

किसानों ने कहा कि यह सुनने में आया है कि लघु और सीमांत किसानों का ऋण माफ होगा। किसान इससे असहमत थे। उनका कहना है कि सभी किसानों का लोन माफ होना चाहिए। किसान छोटा है तो छोटा नुकसान है और बड़ा है तो बड़ा नुकसान होता है, इसलिए लोन माफ करते समय कोई भेदभाव न किया जाए। योगी सरकार ने 86 लाख किसानों का कर्ज माफ किया, जिसमें आगरा के कुछ ही किसानों को इसका लाभ मिल सकता है।

आलू किसान को भूले

किसान चाहते थे कि आगरा के आलू किसानों की भी सरकार सुध ले। आलू का समर्थन मूल्य घोषित किया जाए। गेंहू, चावल का तो समर्थन मूल्य है, लेकिन आलू का नहीं इस समय हालत यह है कि आलू किसान को 100 रुपये की लागत पर 30 रुपये ही मिल रहे हैं। लागत भी नहीं मिल रही है। इन आलू किसानों के बारे में सरकार ने अगर नहीं सोचा तो सब बेकार है।

आलू किसान परेशान

भारतीय किसान संघ के अध्यक्ष मोहन सिंह चाहर का कहना है कि सूखा और ओलावृष्टि से किसान परेशान है। सरकार का ध्यान इस ओर भी होना चाहिए कि 2015 में ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश में नुकसान हुआ है किसानों का, लेखपालों ने किसानों को चेक नहीं बांटे। सदर तहसील में 580 किसानों के चेक नहीं बांटे। इसकी भी जांच कराई जाए और मुआवजा दिया जाए।

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