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नोटबंदी के खिलाफ साथ एक जुट हुई पार्टियां, ममता बोलीं- यह महा-आपातकाल है, क्‍या पीएम देंगे इस्‍तीफा?

नोटबंदी के मुद्दे पर साथ आते हुए विपक्ष ने नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधा है। मंगलवार को नई दिल्‍ली में आयोजित प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में कांग्रेस अध्‍यक्ष सोनिया गांधी नहीं पहुंची। उनकी जगह राहुल गांधी ने नेतृत्व किया। हालांकि कॉन्‍फ्रेंस में सभी विपक्षी दलों को आमंत्रित किया गया था कांग्रेस, टीएमसी, आरजेडी, जेडीएस, जेएमएम, एआईयूडीएफ के सदस्‍यों ने हिस्‍सा लिया। जबकि बसपा, सपा, एनसीपी, सीपीआई, जेडीयू, सीपीएम जैसे प्रमुख विपक्षी दलों के प्रतिनिधि गायब रहे। बैठक में राहुल गांधी ने कहा कि ’30 दिसंबर आने वाला है और हालात वहीं हैं। नोटबंदी का उद्देश्‍य पूरी तरह फेल हो गया है। पीएम को देश को जवाब देना चाहिए कि नोटबंदी का असली मकसद क्‍या था और जो इससे प्रभावित हुए हैं, वह उनके लिए क्‍या करेंगे।’ सहारा के आरोपों से शीला दीक्षित के इनकार पर राहुल ने कहा कि भ्रष्‍टाचार के खिलाफ नरेंद्र मोदीजी ने कोई कानून नहीं निकाला। हम उनको पूरा सपोर्ट देंगे। अगर लड़ाई लड़नी है तो पीएम क्‍यों पीछे रहें। वो खुद आगे आकर क्‍यों नहीं कहते कि मुझपर आरोप लगे हैं तो जांच कर लीजिए।

पं. बंगाल सीएम ममता बनर्जी ने भी मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि ‘मोदीजी ने कहा कि अच्‍छे दिन आएंगे, क्‍या यही अच्‍छे दिन हैं?’ ममता ने नोटबंदी को घोटाला बताते हुए कहा कि ‘नोटबंदी बहुत बड़ा घोटाला है, आजादी के बाद सबसे बड़ा। नोटबंदी से देश 20 साल पीछे चला गया है।’ उन्‍होंने नरेंद्र मोदी सरकार पर तानाशाही करने का आरोप लगाते हुए कहा कि ‘यह (मोदी) निडर सरकार है, वे किसी के बारे में कुछ नहीं सोचते। उनका जो मन आता है वही करते हैं, संघीय ढांचा पूरी तरह नष्‍ट कर दिया है। यह आपातकाल नहीं है, यह महा-आपातकाल है।’ ममता ने टूटी-फूटी हिंदी में कहा, ”कैशलेस के नाम पर मोदी गवर्नमेंट बेसलेस हो गया, टोटल फेसलेस हो गया।”

ममता ने 50 दिन के पीएम के वादे पर भी तंज कसते हुए पूछा कि ‘अगर 50 दिन बाद भी चीजें सही नहीं होती तो क्‍या पीएम मोदी जिम्‍मेदारी लेते हुए प्रधानमंत्री पद से इस्‍तीफा देंगे?’

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