ट्रिपल तलाक बैन मत करो, बस ये हक महिलाओं को भी दे दो !

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ट्रिपल तलाक किसी भी मुस्लिम पुरुष को ये अधिकार देता है कि तीन बार ‘तलाक’ शब्द कहकर वो अपनी पत्नी को तलाक दे सकता है. सोचिए क्या हो अगर हम ये अधिकार पुरुषों के हाथ से लेकर महिलाओं को दे दें,
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ट्रिपल तलाक और उसके बुरे पक्षों के बारे में अबतक बहुत कुछ कहा जा चुका है. कैसे ये मुस्लिम महिलाओं की वैवाहिक स्थिति को खतरे में डालता है, उन्हें अपने साथ होने वाले अत्याचार और दुर्व्यवहार के प्रति सहनशील और कमजोर बनाता है. यही नहीं उनके अधिकारों के लिए भी खतरा पैदा करता है. यहां तक की भाजपा ने उत्तर प्रदेश चुनाव भी ट्रिपल तलाक के मुद्दे पर महिलाओं की भावनाओं को भुनाकर जीत लिया.


जहां एक तरफ यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ट्रिपल तलाक की तुलना द्रौपदी के चीर-हरण से करने और इस मुद्दे के खिलाफ लोगों से खुलकर बोलने की अपील करने में व्यस्त हैं तो वहीं दूसरी तरफ प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी इसपर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने के पक्ष में हैं.

लेकिन हमारे पास इस पूरे मुद्दे से निपटने के लिए एक शानदार आइडिया है इससे महिलाओं के अधिकारों से कोई समझौता भी नहीं करना होगा. हमारा आइडिया है- कुछ छोटे बदलावों के साथ ट्रिपल तलाक का अधिकार सभी धर्मों के महिलाओं को दे देते हैं. अब इससे पहले कि हमारे इस ग्रेट आइडिया के लिए आप हमें गालियां देने या हमारा मजाक उड़ाने लगें तो इसके पहले हमें सुन लें.

ट्रिपल तलाक किसी भी मुस्लिम पुरुष को ये अधिकार देता है कि तीन बार ‘तलाक’ शब्द कहकर वो अपनी पत्नी को तलाक दे सकता है. ठीक है ना? तो फिर सोचिए क्या हो अगर हम ये अधिकार पुरुषों के हाथ से लेकर महिलाओं को दे दें, फिर चाहें भले ही वो किसी भी धर्म की हो? आप विश्वास करें या नहीं लेकिन इस पावर से महिलाओं में गजब का विकास होगा.

और महिलाओं के द्वारा तलाक मिलने से होने वाले कुछ फायदों की लिस्ट ये रही-
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1- सनकी पति से महिलाओं तो तुरंत छुटकारा मिलेगा

ट्रिपल तलाक से तुरंत रिजल्ट मिलता है. बस उन तीन जादूई शब्दों को कहें और हो गया काम. इसलिए अगर कोई महिला अपने पति की बकवास और सनक को नहीं झेल पाती तो बिना किसी परेशानी के उससे अपना रास्ता अलग कर सकती है. पलक झपकते ही उसे दोजख से छुटकारा मिल जाता है और सबसे बड़ी बात जिससे पुरुषों को भी चैन मिलेगा की महिलाएं पीड़ित होने का रोना नहीं रो पाएंगी.

2-कानूनी दांव-पेंच से छुटकारा

जरा सोचिए महिलाओं का कितना पैसा बच जाएगा अगर वो अपने पति को ‘तलाक, तलाक, तलाक’ कह दे और तलाक हो जाए. ये बात तो किसी से छुपी नहीं है कि तलाक के केस में कितना पैसा खर्च होता है और वकील का चार्ज अलग से लगता है. उसके बाद कोर्ट की ये तारीख पर तारीख वाली पद्धति अलग सिरदर्द देती है. लेकिन अगर तीन तलाक का हथियार उनके हाथों में आ गया तो फिर कोर्ट कचहरी के चक्कर में पड़ने से खर्च होने वाले पैसे बच जाएंगे.

3- क्या तेरा क्या मेरा

शादी का मतलब होता है जो मेरा है वो तेरा है. शादी के बाद एक आदमी और एक महिला अपना सबकुछ एक दूसरे से शेयर करते हैं. फिर चाहे वो घर हो, पैसे, सुख-दुख और सबसे बढ़कर अपनी पूरी जिंदगी. तो फिर जब उनके रास्ते अलग हो रहे हैं तो फिर किसी तरह का भेदभाव क्यों हो? तो कैसा हो अगर हम पुरखों से चली आ रही अपनी प्रथा को थोड़ा सा घुमा दें और इसे महिलाओं के फायदे के लिए मोड़ दें. दरअसल ये जरुरी कर देना चाहिए की तलाक के बाद महिलाओं को अपने पति की संपत्ति के 50% मिलेगा.

4- बच्चे माँ के ही पास रहेंगे

बच्चे किसके पास रहेंगे ये लड़ाई भी अपने आप में एक लंबा और दुखद तरीका है. समय तो बर्बाद होता ही है बच्चे परेशान होते हैं सो अलग. इसलिए ट्रिपल तलाक के इस नए कानून में एक प्वाइंट ये डाल देते हैं कि बच्चे माँ के साथ ही जाएंगे. आखिर बच्चों को मां की सबसे ज्यादा जरुरत होती है. है ना?

5- शिकारी ही शिकार बन जाएगा

यकीन मानिए इस कानून से धमाकेदार बदलाव आएगा. महिलाएं विक्टिम यानि की पीड़ित होने का रोना रोना बंद कर देंगी. बल्कि अब उनके पास लड़ने और अपने लिए खड़े होने के लिए एक ठोस आधार होगा. यही नहीं कोई भी समझदार आदमी अपने होशो-हवास में तो अपनी पत्नी के साथ दुर्व्यवहार, मार-पीट, गाली-गलौज या फिर उसे धोखा देने की हिम्मत नहीं करेगा. क्योंकि उसे पता होगा की उसकी एक गलत हरकत तलाक दिला सकती है.

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