एक तरफ जनता नोटबंदी की मार से त्रस्‍त है तो दूसरी ओर भाजपा अपने प्रचार-प्रसार के लिए सैकड़ों मोटरसाइकिलें खरीद कर मस्त है

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एक तरफ जनता नोटबंदी की मार से त्रस्‍त है तो दूसरी ओर भाजपा अपने प्रचार-प्रसार के लिए सैकड़ों मोटरसाइकिलें खरीद कर मस्त है एक तरफ जनता नोटबंदी की मार से त्रस्‍त है तो दूसरी ओर भाजपा अपने प्रचार-प्रसार के लिए सैकड़ों मोटरसाइकिलें खरीद रही है। समाजवादी पार्टी ने बाइक खरीद पर सवाल उठाए हैं। नई दिल्‍ली। एक तरफ जनता नोटबंदी की मार से त्रस्‍त है तो दूसरी ओर भाजपा अपने प्रचार-प्रसार के लिए सैकड़ों मोटरसाइकिलें खरीद रही है। मामला पूर्वांचल के गोरखपुर का है। यहां खोराबार ब्‍लॉक के जंगल सिकरी गांव के एक प्‍लाट में 245 बाइक और तीन स्‍कूटी रखी हुई हैं। बताया गया है कि इनमें से 188 बाइकों का पंजीयन भाजपा के क्षेत्रीय कार्यालय गोरखपुर के बेनीगंज नाम पर किया गया है। समाजवादी पार्टी ने पूरे मामले की जांच की मांग की है। पार्टी प्रवक्‍ता जूही सिंह का कहना है कि नोटबंदी में लोगों को दो-दो हजार रुपये मिलने मुश्‍किल हो गए हैं तो भाजपा इतनी बाइक क्‍यों और कैसे खरीद रही है।

जब इतनी बाइक खरीदी गई है तो जाहिर सी बात है कि कार्यकर्ताओं के लिए पेट्रोल का भी इंतजाम होगा। आखिर उसे कैसे खरीदा जा रहा है। कौन फंडिंग कर रहा है। भाजपा के पास नोट कहां से आ गए इतने? उत्‍तर प्रदेश भाजपा के मीडिया प्रभारी हरीश श्रीवास्‍तव ने बताया कि सभी विधानसभाओं के तीन-चार पूर्णकालिक कार्यकर्ताओं को प्रचार-प्रसार के लिए बाइक दी जाएंगी। ताकि बूथ स्‍तर तक कम पैसे में संपर्क हो सके। हर जगह बड़ी गाड़ी से तो जाया नहीं जा सकता। एक बाइक की कीमत 37,105 रुपये बताई गई है। जबकि प्रत्‍येक बाइक के रजिस्ट्रेशन पर 2668 रुपये खर्च हुए है। गोरखपुर मंडल में 62 विधानसभा क्षेत्र बताए गए हैं। बताया गया है पूरे मंडल की बाइक एक जगह उतरवा दी गई हैं। एक बिल्डर के खाली पड़े प्लाट में टेंट लगाकर वह गाड़ियों को रखा गया है। सभी सफेद कलर की हैं, साथ ही उनकी पेट्रोल टंकी पर कमल के फूल का निशान है। इनका रजिस्ट्रेशन गोरखपुर आरटीओ से किया गया है। इन्‍हें शाहपुर, बशारतपुर से खरीदा गया है।

 

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