अखिलेश को सत्‍ता मे दुबारा काबिज होने के लिए बेहद अहम हैं पांचवां चरण !

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पूर्वांचल के 11‍ जिलों की 51 सीटों पर चुनाव हो रहे हैं.ऐसे मे चुनावी विश्‍लेषकों के मुताबिक यह चरण खास तौर पर दो वजहों से बेहद अहम है. पहली बड़ी वजह बताई जा रही है इस दौर में जो भी पार्टी जीतती है, उसी दल की सरकार बनती है. इसकी बानगी इस बात से समझी जा सकती है कि पिछली बार सपा ने यहां से 37 सीटें जीती थीं. 2007 में बीएसपी के यहां से 26 प्रत्‍याशी जीते थे. 1991 में बीजेपी को यहां से 40 सीटें मिली थीं.

इस लिहाज से दूसरी वजह यह है कि यदि अखिलेश यादव को अपनी सत्‍ता बचानी है तो यहां से अपनी बढ़त को बरकरार रखना होगा. हालांकि गठबंधन के तहत सपा की सभी सीटों पर खुद नहीं लड़ रही, बल्कि 14 पर गठबंधन की साथी कांग्रेस भी मैदान में है. चार सीटों पर तो दोनों आमने-सामने भी हैं. ऐसे में एक-दूसरे से हार कर भी जीतना है.पिछली बार यहां बीजेपी और कांग्रेस को पांच-पांच, बीएसपी को तीन और पीस पार्टी को दो सीटें मिली थीं.

इस चरण में बलरामपुर, गोण्डा, फैजाबाद, अंबेडकरनगर, बहराइच, श्रावस्ती, सिद्धार्थनगर, बस्ती, संत कबीरनगर और सुल्तानपुर जिले की विधानसभा सीटें शामिल हैं. पांचवें चरण में करीब 83 लाख 80 हजार महिलाओं समेत कुल एक करोड़ 81 लाख 71 हजार 826 मतदाता 12 हजार 555 मतदान केंद्रों पर अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकेंगे. पांचवें चरण में 40 महिलाओं समेत कुल 607 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं. अमेठी में सबसे अधिक 24 उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं. अंबेडकरनगर के आलापुर में सपा प्रत्याशी चंद्रशेखर कनौजिया के निधन के कारण चुनाव आयोग ने यहां मतदान की तारीख 9 मार्च निर्धारित की है!

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